सीता लंका में कितने दिन रही? सीता जी लंका में कितने दिन रही ? ashok vatika where ravana kept sita .

सीता लंका में कितने दिन रही? सीता जी लंका में कितने दिन रही ? ashok vatika where ravana kept sita .

हमारी भारतीय sanskriti सभी से अलग है। यह अपनी पौराणिक कथा और रीति-रिवाजों (rituals) से जाना जाता है यह कहा जाता है कि हमारे भारत(India) का इतिहास बहुत ही खास है क्योंकि हमारे India के इतिहास में कई सारी महान ऐतिहासिक(historical) चीजें हुई है। जिन पर कई सारे काव्य महाकाव्य लिखे गए हैं।

आज हम इस article में ऐसे ही एक महाकाव्य के बारे में बात करेंगे।

यह महाकाव्य रामायण (ramayan) है। रामायण महाकाव्य रघुवंश के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम Ram की कहानी है। Ramayan संस्कृत में लिखा गया महाकाव्य है और यह है ऋषि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया है।

रामायण में कुल 6 अध्याय हैं। जिन्हें कांड भी कहा जाता है इन 6 अध्याय में कुल 24000 श्लोक है। ramayan के अलावा Ram की जीवनी पर एक और ग्रंथ लिखा गया है। जिसका नाम है रामचरितमानस(Ramcharitmamas) परंतु फर्क सिर्फ इतना है कि रामचरितमानस Tulsidas जी की लिखी हुई है।

तो चलिए अब आपको बताते हैं ramayan के कुछ अध्ययन की घटनाओं के बारे में।

सबसे पहले आपको बताते हैं Sita लंका में कितने दिन रही? Sita जी lanka में कितने दिन रखा गया? कितने दिनों के बाद Sita जी को लंका से छुड़ाया गया?

Ravan ने सीता माता को lanka में 435 दिनों के लिए रखा था रावण ने sita का अपहरण तब किया था जब उनके 14 वर्ष के वनवास में सिर्फ 1 वर्ष शेष बचा था।

रावण ने sita का हरण अपनी बहन सूर्पनखा का laskman द्वारा हुए अपमान का बदला लेने के लिए किया था। एक दिन जब ram sita और lakshman अपनी कुटिया के बाहर बैठे थे तब वहां से गुजरते हुए सूर्पनखा राक्षसी ने ram को देखा और उनके रूप से मोहित हो गई और एक सुंदर स्त्री का रूप धारण करके उनके पास अपने विवाह का प्रस्ताव लेकर गई।

परंतु ram मर्यादा पुरुषोत्तम थे और वह सिर्फ अपनी पत्नी sita से ही प्यार करते थे उन्होंने उसका प्रस्ताव नकार दिया। इस बात से क्रोधित होकर मैं राक्षसी अपने असली रूप में आ गई और बोली कि अगर राम ने उससे vivaah नहीं किया तो वह sita को मार देगी इस बात से क्रोधित होकर लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटी थी।

यह बात जब सूर्पनखा ने जाकर अपने भाई ravan को बताई तो उसे बहुत क्रोध आया और उसने sita का अपहरण कर लिया ताकि वह ram और lakshman से अपनी बहन के अपमान का बदला ले सके।

सीता के पिता का नाम

अब आपको बताते हैं सीता के पिता का नाम क्या था? सीता के पिता कौन थे? सीता के पिता किस राज्य के राजा थे? सीता माता के पिता का क्या नाम था?

Sita के पिता का नाम राजा janak था। राजा जनक mithila के राजा थे। राजा जनक सीता के पालक पिता ही थे क्योंकि sita माता का जन्म भूमि से हुआ था।

उनकी जन्म को लेकर कई सारी कथाएं और कहानियां प्रचलित हैं परंतु ramayan के अनुसार यह माना जाता है कि एक बार mithila में अकाल पड़ गया था। उस समय ऋषि यों के कहने पर राजा janak ने यज्ञ करके खेत में अपने हाथों से हल बोया था उसी समय उनका हल जाकर जमीन में माता sita जिस कलश में थी उस kalash से टकराया। फिर उन्होंने वहां से खोदकर kalash को प्राप्त किया और देखा उसमें एक बहुत ही सुंदर कन्या थी। राजा janak को कोई संतान नहीं थी तो उन्होंने sita को अपनी beti के रूप में स्वीकार कर लिया।

सीता की माता का नाम

अब आपको बताते हैं sita की माता का नाम क्या था? Sita की माता कौन थी? क्या नाम था सीता की माता का?

सीता की माता का नाम सुनैना था। जैसा कि हमने आपको उपर बताया राजा janak और sunayna सीता के पालक माता-पिता थे क्योंकि sita जी का जन्म भूमि से हुआ था।

राजा janak और sunayana को कोई संतान नहीं थी तो उन्होंने sita जी को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार करके उनकी परवरिश की थी।

सीता जी के अन्य नाम

अब आपको बताते हैं sita जी के और कौन-कौन से नाम है? Sita जी को और कौन कौन से नाम से जाना जाता है? Sita जी के कितने नाम हैं?

Sita जी के कई सारे नाम है उन्हें कई सारे नामों से जाना जाता है ऐसे ही कुछ नाम है यह-

  1. मैथिली
  2. जानकी
  3. सिया
  4. सुयते
  5. सवती
  6. वैदेही
  7. जानकत्मजा
  8. प्रियार्हा
  9. रामवललाभा
  10. सुनयनासुता

Sita किसकी पुत्री थी ?

Ram और sita का विवाह: अब आपको बताते है कि sita किसकी पुत्री थी? राम और सीता का vivaah कैसे हुआ? Sita से vivaah करने के लिए राम को क्या करना पड़ा? सीता से vivaah के लिए राजा janak ने क्या शर्त रखी थी?

जैसा कि हमने आपको उपर बताया सीता mithila के राजा janak और उनकी पत्नी sunayana की पुत्री थी। परंतु यह दोनों उनके जन्म देने वाले माता पिता नहीं थे उन्होंने सिर्फ sita का पालन पोषण किया था।

राजा janak के पास परशुराम द्वारा shiv ji का एक धनुष रखा हुआ था। वह धनुष parshuram के अलावा कोई भी नहीं उठा सकता था परंतु sita ने धनुष उठा लिया था। यह देखकर राजा जनक ने यह निर्णय लिया कि जो भी इस धनुष को उठाएगा वही उनकी putri के लिए योग्य वर होगा।

Raja जनक ने जब sita का स्वयंवर रखा तब उस में आने वाले हर वर को वह dhanush उठाना था। परंतु कोई भी वह धनुष नहीं उठा पाया आखिर में महर्षि वशिष्ठ ने श्रीराम को शिवजी का धनुष उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा।

भगवान श्री Ram जब शिव जी के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह धनुष टूट गया। यह देखकर राजा janak ने अपनी पुत्री sita का vivaah राम से कर दिया।

इस प्रकार ram और sita का विवाह संपन्न हुआ था।

ashok vatika where ravana kept sita . अशोक वाटिका जहां रावण ने सीता को रखा ?

अब आपको बताते हैं ashok vatika कहां है जहां पर रावण ने sita को रखा था? अशोक वाटिका किस जगह पर है?

Ashok vatika जहां पर ravan ने सीता को रखा था। वह रावण के राज्य लंका में ही है। रावण ने माता sita को ashok vatika में रखने से पहले वहां उनके लिए सारे प्रबंध(arrangements) कर दिए थे ताकि उन्हें किसी भी चीज की जरूरत हो तो उन्हें मिल सके।

Sita को ashok vatika में रखने का दूसरा कारण यह भी था कि ashok vatika में ravan की मर्जी के बिना ना तो कोई आ सकता था और ना ही जा सकता था।

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