शाकाहारी जिव जांयट पांडा और क्रुशली बियर

सारा का सारा खेल सही टाइमिंग का होता है । गर्मियों के आखिरी से लेकर पतजड़ की शुरुआत तक ब्राउन बीयर अपनी खुराक काफी बढ़ा देते हैं ।

भालु अपने शरीर में इतना फैट जमा कर लेते हैं कि सर्दियों के मौसम में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती है ।

सारे भालु मांसाहारी माने जाते हैं । जबकि जांयट पांडा सबसे अलग हैं । यह शुद्ध शाकाहारी होते हैं । जंगल में यह उन इलाकों में रहते हैं । जहां पर हरे हरे बांस हो ।

इनकी रेशेदार पत्तियों वाली खुराक बड़ी ही अजीब है । क्योंकि इनका डाइजेस्टिव सिस्टम बांस तोड़ने के लिए बना है । बांस से इन्हें ज्यादा उर्जा भी नहीं मिलती है ।

यह जो भी खाते हैं । उनका ज्यादातर हिस्सा तो बिना पचे ही बाहर निकल जाता है । जिनकी वजह से इन्हें दिन के 14 घंटे तक खाना खाना पड़ता है । ताकि उसे जो भी खाना मिले उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकें । इन्हें दिनभर में कम से कम 15 किलो बांस खाना पड़ता है ।

यह बहुत तेजी से खाते हैं और बांस की कोंपल को छीलकर के सिर्फ 40 सेकंड में खा जाते हैं ‌। जांयट पांडा की भोजन वाली नली काफी बड़ी होती है । जिसके कारण उसके गले में जाने वाली कोई ठोस खपच्ची उसके गले में नहीं फंसती है ।

सन बियर तरह तरह की चीजें खाते हैं । अपने सुनने की शक्ति की वजह से यह मीठे फलों तथा बेरीज का पता लगा लेते हैं । इसके अलावा यह कीड़े मकोड़े , परिंदे और छिपकली अभी खाते हैं । इनके 10 सेंटीमीटर लंबे नाखून बड़े ही काम के होते हैं ।

इनसे यह है अब पुराने पेड़ों के बीच में प्रोटीन से भरे कीड़ों को पकड़ कर के अपनी खुराक निकाल लेते हैं सन बीयर की जुबान काफी लंबी होती है ।

शाकाहारी जिव जांयट पांडा

इसीलिए यह मधुमक्खियों के छत्ते में से शहद भी बाहर निकाल लेते हैं । इनके इस मीठे की तलब के कारण इसे हनि बियर भी अभी कहा जाता है ।

लंबे और तकड़े होने के बावजूद भालु के ऊपर अपने आसपास के पर्यावरण की बड़ी जिम्मेदारी होती है । आर्कटिक में पोलर बीयर को बड़ी आहम प्रजाति माना जाता है ‌। ऐसा जीव जो कई दूसरे जीवों को भोजन मुहैया करवाता है । इनकी जूठन से कई दूसरे भेड़ियों का पेट भर जाता है ।

पोलर बियर सील की आबादी को भी नियंत्रित रखते हैं । जिनकी वजह सेवन मछलियों की आबादी बढ़ती है । ब्राउन बियर भी अपने सिस्टम में सबसे बड़े शिकारी होते हैं । वह भी आहार श्रंखला को संतुलित रखते हैं ।

शिकार करते वक्त आम तौर पर कमजोर तथा बीमारि को ही मारते हैं । जिससे कि तगड़े और दमदार जीव ही बचते हैं । जिससे कि जंगली जीवो के पूरे समुदाय को फायदा होता है ।

भालू मुर्दा खोर भी होते हैं । उन लाशों को खा जाते हैं जो कि बीमारियां फैलाती है और उस जगह को प्रदूषित कर सकती है । ज्यादातर भालु सर्वाहारी होते हैं ।

यानी कि सब कुछ खा लेने वाले होते हैं ‌। इसीलिए यह बड़े स्तनधारी जीव बीजों को भी दूर-दूर तक फैलाते हैं जिससे नए पौधे उगते हैं । इनका एक और काम होता है पौधों को खाद देना ।

सफर के दौरान भालु यह काम बखूबी करते हैं । हम कह सकते हैं कि भालु फर वाले वह रक्षक होते हैं जो इलाके की भलाई का पूरा ख्याल रखते हैं ।

जाने कितनी पीढ़ियों से भालु हमारी पिढियो को प्रभावित कर रहे हैं । नॉर्दर्न हेमिस्फीयर में तारों पर नजर रखने वाले इन्हें सम्मान देते हैं । उनसे समर्पित तारामंडल को देखते हैं ।

अमेरिका के कुछ आदिवासी कबिले के लिए यह खास मायने रखते हैं । वह मानते हैं कि इन जिवों में कई अलौकिक शक्तियां है ।

कई जगह पर भालु के चित्र बनाए जाते हैं । उन्हें कड़ी मेहनत ताकत और प्यार का प्रतीक माना जाता है । सांस्कृतिक रूप से भालु को टीचर माना जाता है ।

कहते हैं कि भालु ने ही लोगों को बेरी जमा करना और सेवन मछलियों को पकड़ना सिखाया था । फिनलैंड और रशिया में ब्राउन बीयर को बहुत सम्मान दिया जाता है और यह वहां के राष्ट्रीय पशु है ।वहां के राष्ट्रीय सम्मान और शक्ति के प्रतीक भी हैं ।

अमेरिकी ब्लैक बियर की जानकारी

अमेरिका में दमदार क्रुशली बियर कैलिफोर्निया के झंडे पर लेहराते हैं । वहां के राष्ट्रीय पशु भी है । पश्चिम की पतली संस्कृति में भालु को बहुत सम्मान हासिल है यह बच्चों की अनगिनत कहानियों के हीरो है ।

भले ही असली भालू डराते हो । पर इन स्तनधारी जीवो पर बने खिलौने बड़े ही नरम मुलायम और प्यारे होते हैं । और उनसे बिल्कुल अलग तरह की खुशी मिलती है । भालु को लोग बहुत प्यार करते हैं ।

कुछ को तो राष्ट्रीय धरोहर भी माना जाता है । जैसे कि चीन के जायंट पांडा । इनके खूबसूरत सफेद और काली खाल को यहां के पशु सिंबल का कुदरती रूप माना जाता है ।

कहा जाता है कि पांडा का शांत स्वभाव इस बात का सबूत है कि दो विरोधी शक्तियां बड़े प्यार से एक साथ रह सकती है ।

इसी मान्यता की वजह से जायंट पांडा को भी शांति का प्रतीक माना जाता है । यह खूबसूरत जीव वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन संपत्ति का जीव है । पांडा का हर पहलू खास होता है । उनका मल भी रिसाइकल करके कागज का सामान बनाया जाता है ।

हाल के वर्षों में चीन का नया वर्ष और भी खुशहाली भरा था । क्योंकि जांयट पांडा के 17 बच्चे पैदा हुए थे हर बच्चा बड़ा कीमती है । यह सिर्फ पांडा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भालु परिवार के लिए भी उम्मीद की नई किरण है ।

एक जमाने में भालु की सैकड़ों प्रजातियां थी । आप सिर्फ 8 ही बची है । उनमें से सिर्फ दो प्रजातियों की सेहत ही अच्छी है । उनमें से एक है ब्राउनबीयर । दुनिया भर में उनकी कुल आबादी 200000 से भी ज्यादा है ।

अमेरिकी ब्लैक बियर की आबादी भी ठीक-ठाक है । एक्सपर्ट मानते हैं कि उनकी आबादी आज भी जंगलों में 8.30 से 9.0 लाख तक है । मगर भालु परिवार के दूसरे सदस्यों को खतरे में माना जा रहा है ।

लुप्त जिव जाइंट पांडा

भालु को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । शेर के शिकार , उनके रहने की जगह को खेत बना देना और जंगलों की कटाई और बदलता मौसम भी एक बड़ी समस्या है ।

पिछले 50 सालों में समंदर की बर्फ में बहुत कमी आई है ‌। इसका सीधा असर पोलर बेयर और उसके उसके शिकार की काबिलियत पर हुआ है ।

कुछ भालु को आज भी उनके शरीर के पित और अन्य अंगों के लिए मारा जा रहा है । क्योंकि मान्यता है कि उनके पित में बीमारियों के इलाज की क्षमता होती है ।

उम्मीद है कि जागरूकता अभियान चलाने और सख्त कानून बनाने से इन जिवों का शिकार रोका जा सकता है । चिड़ियाघर और सेंचुरी इन के सरंक्षण में बड़ी भूमिका निभाते हैं । उनकी बदौलत ही हम इन जिवों को करीब से देख पाते हैं और लोगों को जागरूक भी बना सकते हैं । खासकर भालू के बच्चे ।

एक समय ऐसा था जब जाइंट पांडा लुप्त होने की कगार पर थे । लेकिन सच्ची लगन और कड़ी मेहनत के बाद उनकी आबादी अब बढ़ने लगी है । 1970 के आखिरी दिनों में जंगल में सिर्फ 1000 जांयट पांडा ही बचे थे ।

2018 तक इनकी संख्या 18 से 64 तक पहुंच गई । इतनी आबादी ज्यादा तो नहीं थी ,लेकिन लेकिन बेहतर थी । 2016 में इसे लुप्त जिंवो की श्रेणी में डाल दिया गया ।