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ब्रह्मांड में कितना पदार्थ है ? ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी कितनी है ?

ब्रह्मांड अनंत है । इसका कोई छोर नहीं है । काफी समय से हम यह सुनते आए हैं कि ब्रह्मांड में कितना पदार्थ है । इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक काफी समय से प्रयास कर रहे हैं ।

फिलहाल अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के भौतिक मेटल की क्षति गणना की है । उन्होंने पता लगाया है कि ब्रह्मांड में कुल कितना मेटर है ।

एक पत्रिका में छपे आर्टिकल के अनुसार ब्रह्मांड में मेटर की कुल मात्रा 31. 5 फिसदी है । इसमें 1.3 फ़ीसदी मात्रा कम या फिर ज्यादा भी हो सकती है।

ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी कितनी है ?

पदार्थ के अलावा 68.5 फिसदी डार्क हिस्सा है । वह डार्क एनर्जी है ।

डार्क एनर्जी एग्रेसिव में ही बल है जो कि समय के विस्तार को गति देती है । वैज्ञानिकों ने 1990 के दशक में डार्क एनर्जी सुदूर सुपरनोवा को देख कर के अनुमान लगाया था ।

मेटर की मात्रा को समझने के लिए एक दूसरा तरीका भी है । शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस ब्रह्मांड को हम देख सकते हैं । उसमें मौजूद मेटर की मात्रा सूरज की सतह से 66 अरब गुना है।

पदार्थ के ज्यादातर हिस्से यानी कि पदार्थ के लगभग 80 फ़ीसदी हिस्से को डार्क मैटर का जाता है । इसकी प्रकृति कैसी है । इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है ।

हालांकि माना जाता है कि इसमें ऐसे सख्त एटॉमिक कारण हो सकते हैं । जिसकी खोज अभी नहीं हुई है । आप इस से पहले मिले आंकड़ों से पहले मेल खा रही है ।

अलग-अलग टीमों ने अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करके इन आंकड़ों का पता लगाया था । इसमें बिग बैंक से निकले कम ऊर्जा वाले विकिरण के कारण तापमान में होने वाले बदलाव को मापना भी शामिल है ।

ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी कितनी है ?

कैसे लगाया गया कुल पदार्थ का पता ।

वैज्ञानिकों ने पदार्थ का पता लगाने के लिए 90 साल पुरानी एक एक तकनीक का इस्तेमाल किया । इस तकनीक में पदार्थ पर नजर रखी जाती है कि आकाशगंगा में हजारों आकाशगंगा के क्षेत्र में कैसे परिक्रमा करती है ।

इस दौरान यह देखा जाता है कि हर एक आकाशगंगा के क्षेत्र के दौरान मैं कितना मजबूत गुरुत्वाकर्षण मौजूद है । इसी गुरुत्वाकर्षण बल से संपूर्ण बाहर की गणना कर ली जाती है ।

वास्तव में इस तकनीक को अंतरिक्ष वैज्ञानिक फ्रित्स ज्विकी ने विकसित किया था । वह पहले शख्स थे । जिन्होंने 1930 के दशक में डार्क मैटर के अस्तित्व का संदेश जताया था ।

उन्होंने आकाशगंगा के कोमो क्लस्टर में देखा की सारी आकाशगंगा का गुरुत्वाकर्षण बल उन्हें एक दूसरे से दूर जाने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था । तब उन्होंने अंदाजा लगाया कि वहां कोई अदृश्य मैटर है जो अपनी भूमिका निभा रहा है ।

क्या है तकनीक ?

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक दल ने नासा टीम के साथ मिलकर के एक नया उपकरण तैयार किया है । यह उपकरण ज्यादा सटीक तरीके से यह बता सकता है कि आकाशगंगा किस क्लस्टर से जुड़ी हुई है ।

शोधकर्ताओं ने अपने उपकरण का इस्तेमाल स्लोन डिजिटल स्काई सर्वे पर किया। यह ब्रह्मांड का सबसे विस्तृत 3D नक्शा है । जिसके जरिए उन्होंने आकाशगंगाओं के 18 सौ क्लस्टर की गणना की और एक सूची तैयार की ।

आखिरकार उन्होंने सूची में दर्ज जितने कलस्टर की निगरानी की थी । उनके प्रति इकाई आयतन की कंप्यूटर विश्लेषण से तुलना की । इनमें से हर सिमुलेशन में ब्रह्मांड के संपूर्ण मेटर के भार के एक अलग मात्रा दर्ज की गई थी ।

जिन सिमुलेशन में कम पदार्था था । जिन सिमुलेशन में कम क्लस्टर थी । जबकि जिन में ज्यादा पदार्था उनमें ज्यादा क्लस्टर था ।

उसके बाद में उन्होंने गोल्डी लोन मात्रा निकाली । वह बिल्कुल सही बैठ गई । इस तकनीक में 3 या ज्यादा गणना को निकाल कर के करना हासिल की जाती है ।

सटीक तरीके से प्रमाण में मौजूद मेटर की मात्रा समझने से वैज्ञानिक दाब मेटर की दिशा में करीब आ गए हैं ।

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