इलायची के फायदे। इलायची दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला

इलायची के फायदे इलायची दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला

इलायची को मेहक की मल्लिका भी कहा जाता है । इंसानों ने ही इलायची को मसालों की मल्लिका बनाया है । पश्चिमी क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में वर्षा की ऋतु खत्म हो चुकी है और कोहरे भरा माहौल बना हुआ रहता है । यह समय सितंबर महीने का है ।

Sakleshpura को नाम मिला है ऐश्वर्या से । इसको प्रकृति ने सब कुछ दिया है । उपजाऊ मिट्टी , भरपूर वर्षा सब कुछ प्रकृति ने दिया है । यहां पर काली मिर्च तथा इलायची उगते हैं । साथ में कॉपी तथा सुपारी भी उगते हैं ।

इलायची का पौधा एक झाड़ी नामा पौधा होता है । इसकी टहनियों पर सुंदर सुंदर फूल खिले हुए होते हैं । हर लता चमकीले कैप्सूल से लदी हुई रहती है ।

इलायची की खासियत । इलायची दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला

इलायची हरी , चिकनी तथा दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला भी माना जाता है । इलायची के पौधे की पत्तियां सीधी हरी तथा लंबी होती है तथा पंखे नुमा होती है ।

जहां पर भी इलायची के पौधे होते हैं वहां पर आसपास की वादियों में खुशबू फैली हुई रहती है और मधुमक्खियां भी आसपास भिनभिनाती हुई मिल जाती है ।

मसालों की रानी इलायची को तोड़ने का काम परंपरागत रूप से अधिकतर महिलाएं ही करती है । यह अनुभवी तथा कुशल श्रमिक भी होती है ।

इलायची के पौधे की बेल के हर शाखा पर 8 से 10 इलायचीयां होती है । इसको तोड़ने के लिए ज्यादा जोर लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है ।

इलायची की बेल को हाथ से उठा कर के धीरे-धीरे इलायची को तोड़ लिया जाता है । कुछ इलायची को छोड़ दिया जाता है तथा कुछ इलायची को तोड़ लिया जाता है ।

इलायची के जो बीज आसानी से हाथ लगाने पर टूट जाते हैं उसे इकट्ठा कर लिया जाता है और जो इलायची हाथ लगाने से नहीं टूटती है उसे छोड़ दिया जाता है ।

इलायची भी दो तरह की होती है एक बड़ी काली इलायची होती है तथा दूसरी छोटी हरी इलायची होती है ।

इलायची का यह पौधा किस परिवार का पौधा है।

इलायची का यह पौधा Zingiberaceae परिवेश से है । अदरक के परिवार का यह पौधा जमीन के अंदर उगने वाले कंद के परिवार का है ।

अदरक हल्दी और इलायची तीनों एक दूसरे के रिश्तेदार होते हैं यह तीनों एक ही परिवार के सदस्य हैं यह तीनों जमीन के अंदर कंद के रूप में पैदा होते हैं ।

इलायची का विज्ञानिक नाम क्या है ?

हर पौधे का अपना एक विज्ञानिक नाम होता है । ठीक उसी तरह से इलायची का भी वैज्ञानिक नाम है । इलायची का विज्ञानिक नाम Elettaria cardamomum है । इस वैज्ञानिक नाम की जड़ संस्कृत भाषा में Ela के नाम से जानी जाती है ।

हिंदी , उर्दू और गुजराती में इसे इलायची कहते हैं और मलयालम भाषा में इलायची को Elatbari कहते हैं। तमिल और तेलुगू भाषा में इलायची को Elakai कहते हैं । कन्नड़ भाषा में इलायची को Yellaki कहते हैं ।

इलायची का किसी भी भाषा में कुछ भी नाम क्यों ना हो इलायची की पहचान तो हमेशा खुशबू से ही होती है ।

इलायची की उत्पत्ति कहां हुई

इलायची की उत्पत्ति दक्षिण भारत में हुई । दक्षिणी भारत के पश्चिमी घाट में इलायची की उत्पत्ति मानी जाती है । भारत में इलायची की उपज भारत के तीनों दक्षिणी राज्यों में होती है ।

केरल कर्नाटक और तमिलनाडु में इलायची की खूब पैदावार तथा खेती होती है । इन तीनों राज्यों में छोटी इलायची की को खेती होती है ।

मसालों की रानी इलायची ने हम इंसानों को बहुत समय पहले ही अपनी और आकर्षित कर लिया था । मसालों की रानी की जन्मभूमि भारत ने मसालों की रानी इलायची का प्रयोग हजारों वर्षों से ही करता आ रहा है ।

इलायची का प्रयोग भारत वर्षों से औषधि के रूप में तथा मसाले के रूप में करता आ रहा है । आयुर्वेद में इलायची को गर्म तासीर का मसाला कहा जाता है ।

ग्रंथ चरक संहिता तथा सुश्रुत संहिता में इलायची के गुणों का वर्णन

भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता तथा सुश्रुत संहिता में इलायची के गुणों का वर्णन मिलता है । आयुर्वेदिक ग्रंथों में इलायची का प्रयोग आहार तथा औषधी दोनों के रूप में बताया गया है । यह दोनों ग्रंथ वैदिक काल के बाद में लिखे गए हैं ।

इलायची की खुशबू के चर्चे उसकी जन्मभूमि तक ही सीमित नहीं है इलायची ने पूरे विश्व में भ्रमण किया है । इलायची ने देशों की तथा महाद्वीपों की सीमाओं से परे भी भ्रमण किया है । इलायची का इतिहास मानव सभ्यता के इतिहास के जितना ही पुराना है ।

इलायची ने तूफानी समुद्र पार कि , लंबी जमीनी यात्राएं की । इलायची की कीमत इतनी थी कि लोग इलायची के लिए खतरे तक मोल ले लेते थे । जिससे कि इलायची को एक और नाम मिला देव लोक के बीज ।

ईशा के 4 शताब्दी पूर्व Theophrastus वनस्पति शास्त्र के जनक यूनान में इलायची देखी भी थी । और इन्होंने इलायची प्रयोग भी कर ली थी ।

इलायची का वर्णन औषधि के रूप

De Materia Medica के रचीयता ने इलायची का वर्णन औषधि के रूप में भी किया हुआ है । इलायची का प्रयोग मरोड़ पेट दर्द , लकवा और मिर्गी से आराम के लिए भी इलायची का प्रयोग किया जाता है ।

De Materia Medica विश्व भर में आधुनिक चिकित्सा पुस्तकों में प्रथम मानी जाती है । इससे पता चलता है कि इलायची दुनिया भर की सैर कर रही थी तथा पूरे विश्व में अपनी धाक जमा रही थी ।

Gardens of Babylon के राजा के बगीचे में इलायची को 720 ईसा पूर्व में भी उगाया जा चुका था । इलायची की महक एक ऐसी महक थी जो कि अमीर तथा ताकतवर लोगों को उकसा रही थी ।

इलायची के ताजे तोड़े हुए गानों को सुखाना जरूरी होता है। क्योंकि इसमें 80% तक नमी होती है । इन्हें तब तक सुखाया जाता है । जब तक कि इलायची की नमी घटकर के 10% तक नहीं हो जाती है ।

पहले इलायची को सुखाने का काम धुप से किया करते थे । आज वही काम इलायची को सुखाने का मशीनें करती है । मशीन में मौजूद गर्म हवा इलायची को बहुत तेजी से सुखा देती है । इससे इलायची का मेहक और रंग भी बरकरार रहता है ।

सूखने के बाद इस पर पोलिस कर दी जाती है । इलायची बाजार में बेचने के लिए और खरीदने के लिए तैयार हो जाती है । सूखने के बाद इलायची का छिलका सुखा हुआ तथा झुरीदार हो जाता है ।

इलायची की पक्की दोस्त मधुमक्खी

सूखने के बाद इस पर पोलिस कर दी जाती है । इलायची बाजार में बेचने के लिए और खरीदने के लिए तैयार हो जाती है । सूखने के बाद इलायची का छिलका सुखा हुआ तथा झुरीदार हो जाता है ।

इलायची का पौधा एक प्राचीन होता है जिंदा रहने के लिए इन्होंने भी प्रकृति की मार सही है । इलायची ने अपने विकास काल में दुश्मनी और दोस्ती की है । इलायची की पक्की दोस्त मधुमक्खी होती है । यह दोनों एक दूसरे के लिए ही बने होते हैं ।

इलायची का फूल किस किस्म का फूल है ?

इलायची का फूल pin Flower किस्म का फूल है । इलायची के फूल के जननांगों की स्थिति ऐसी होती है कि इनमें स्वपरागण नहीं हो सकता है । यह फूल पर परागित होता है ।

इलायची के पौधे में परागण मधुमक्खियों के द्वारा ही होता है । जब मधुमक्खियां फूलों में रस को चुंसने के लिए आती है तब दूसरे पौधों के परागकण इन के पत्तों से चिपक जाते हैं ।

इलायची का धार्मिक और व्यापारिक इतिहासइलायची देश की सबसे बड़ी नगदी फसलों में भी आती है ।

इलायची की उत्पत्ति कब हुई

इलायची के फायदे इलायची दुनिया का तीसरा सबसे महंगा मसाला

इलायची की उत्पत्ति कब हुई । यह कोई भी नहीं जानता है । इलायची का इतिहास लंबा तथा गौरवशाली है । चाणक्य ने अपने राजनैतिक ग्रंथ कोटीले अर्थशास्त्र में इलायची को औपचारिक अतिथि को भेंट के रूप में देने की बात कही है ।

इलायची दुनिया भर में तीसरा सबसे महंगा मसाला है केसर तथा वनीला के बाद में इलायची का नंबर आता है ।

इलायची को साबुत तथा बंद डिब्बे में रखना सबसे अच्छा माना जाता है । जब चाहिए तभी इलायची के बीजों को निकालना चाहिए । बीज की खुशबू बड़ी जल्दी ही उड़ जाती है और इसी खुशबू के लिए ही तो हम इतनी मेहनत करते हैं ।

खुशबू को कुछ खास मेहक और स्वाद कुछ एरोमेटिक तत्वों से मिलते हैं । यह तत्व वह होते हैं जो कि इसके पौधे बनाते हैं ।

इलायची के मामले में रसायन इलायची के काले बीजों में मौजूद होता है । इलायची के बीज थोड़े चिकने होते हैं ।

इलायची में कौन कौन से रसायन होते है ?

इलायची में मुख्य अणु Cineole है । Cineole बैक्टीरिया नाशक होता है । यह सांस में बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मार कर मुंह को ताजा तथा स्वस्थ रखता है ।

इसीलिए तो इलायची को हमेशा से दंत मंजन कुल्ले करने के लिए तथा माउथ परिसर में इस्तेमाल किया जाता है । Cineole एक अच्छा Expectorant भी है । Cineole बलगम को दूर करके खांसी में राहत प्रदान करता है । यह स्वास नलियो को भी खोलता है ।

इलायची के ओयल Cineole को यदि ऐसे ही लेते हैं तो कोई फायदा नहीं होता है और यदि इसे पानी और खाने की चीज में मिला दो तो इसकी मेहक और स्वाद कुछ अलग ही हो जाता है ।

इलायची किन किन अणु का मिश्रण होता है ?

मसालों की मेहक अनेक मॉलिक्यूल यानी की अणु का मिश्रण होता है । इसके अणु में Borneol पाया जाता है । Borneol की महक कपूर के जैसी होती है । यह एक प्रकार का Terpheon है ।

Terpheon आंतो में आने वाली मरोड़ को कम करता है । मरोड़ को शांत करने का काम करता है ।

कुछ लोग ज्यादा मसालेदार तथा तला हुआ खाना खाने के बाद में पान खाते हैं । क्योंकि इलायची और लोंग दांतो को मजबूत बनाए रखने का काम करते हैं । और खाना पचाने में भी मदद करते हैं ।

जहांगीर की पत्नी नूरजहां ने जहांगीर की मृत्यु के बाद अपने जीवन को खुशबू के नाम कर दिया था । नूरजहां की पसंदीदा महक में इलायची थी ।

चीन के दरबारी जब महाराजा से मिलने जाते उन्हें पेश होने से पहले इलायची चबानी होती थी ।

इलायची का रिश्ता मोहब्बत तथा आशिकी जुड़ा

प्रेम के मामले में भी टोटकों के रूप में इलायची का खूब प्रयोग किया जाता है ‌। इलायची का रिश्ता मोहब्बत तथा आशिकी से भी जुड़ा हुआ है । भारत में इलायची को कामोत्तेजक माना जाता था ।

वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि इलायची सूजन कम करने का काम भी करती है । सूजन रोग का एक कारण भी माना जाता है । अक्सर जब भी कोई रोग होता है तो उससे पहले सूजन आ जाती है । इलायची सूजन को कम करने में अच्छा काम कर रही है ।

इलायची पाचन क्रिया में भी मददगार साबित हुई है । यह पीत के श्राव को बढ़ाती है । यह पिता से तथा गुर्दे की पथरी की भी रोकथाम करती है ।

इलायची की कहानी बड़ी इलायची के बिना अधूरी है ।Amomum Subalatum इलायची बड़ी तथा भूरे रंग की होती है । इसका इस्तेमाल अमूमन पुलाव में , मछली में तथा साग सब्जी के रूप में भी किया जाता है ।

बड़ी इलायची भारत में कहाँ उगाई जाती है ?

बड़ी इलायची उत्तर पूर्वी भारत में उगाई जाती है । सिक्किम राज्य और पश्चिम बंगाल में 4:00 दार्जिलिंग में बड़ी इलायची की खूब खेती होती है । यह तीनों राज्य बड़ी इलायची का घर माना जाता है ।

छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची दोनों आपस में बहने होती है । इन दोनों के बिना मसालों को अधूरा माना जाता है ।

यदि तेल में बड़ी इलायची को डाला जाता है । तब इसकी तेजी कम हो जाती है । मेहक धीरे धीरे तेल में आ जाती है ।

इलायची मीठे और नमकीन दोनों तरीके के खानों में खूब प्रयोग की जाती है । छोटी तथा बड़ी इलायची आपने अलग अलग स्वाद के कारण अलग-अलग व्यंजनों के अधूरेपन को पूरा करती है ।