ब्रेड बनने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी

ब्रेड बनने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी । ब्रेड बनने की प्रक्रिया के पीछे की केमिस्ट्री ।

आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की ब्रेड कैसे बनती है । आम भाषा में तो ब्रेड बनाना बहुत आसान होता है । लेकिन आज हम यह जानेंगे कि विज्ञान के अनुसार ब्रेड कैसे बनती है तथा ब्रेड बनने की प्रक्रिया क्या है ।

ब्रेड बनाना काफी आसान होता है । ब्रेड 4 सामग्री आटा , पानी , नमक और यह यीस्ट को मिला करके बना सकते हो । इन तीनों को मिलाकर के गूंथा हुआ आटा तैयार किया जाता है फिर इसे आटे से ब्रेड बनाई जाती है ।

ब्रेड बनाना सुनने में तो काफी आसान लगता है । लेकिन इसके आणविक स्तर पर काफी जटिल घटनाएं होती है । जिसको समझने के लिए आज हम इस आर्टिकल को लिख रहे हैं ।

ब्रेड बनाने की केमिस्ट्री । ब्रेड में कौन कौन सी रासायनिक प्रक्रियाएं होती है ?

ब्रेड बनने की प्रक्रिया के पीछे की केमिस्ट्री ।

ब्रेड को समझने के लिए सबसे पहले ब्रेड के मुख्य इनग्रेडिएंट्स की बात करते हैं । ब्रेड का मुख्य इनग्रेडिएंट्स आटा है । ब्रेड बनाने के लिए आटे में 10 से 15% तक ग्लूटेनिन और ग्लियाडिन प्रोटीन पाया जाता है । जो कि बड़ी संख्या में अमीनो एसिड से बने अणु होते हैं ।

संयुक्त रूप से इसे ग्लूटेन कहा जाता है । इन प्रोटीन के बिना ब्रेड का बनना काफी मुश्किल होता है । जैसे ही आटे में पानी मिलाया जाता है प्रोटीन पानी के साथ आपस में क्रिया करने लगता है ।

यह हाइड्रोजन बंध भी बना सकते हैं तथा क्रॉसलिंक के बंध को तोड़ भी सकते हैं । यह प्रोटीन पूरे आटे में एक बड़ा ग्लूटेन नेटवर्क बना लेते हैं । जैसे-जैसे आटे को गुंथा जाता है प्रोटीन आपस में और भी ज्यादा प्रतिक्रियाएं करते हैं और आटे को और भी ज्यादा मजबूत बना लेते हैं ।

ग्लूटेन आटे में नमक का प्रभाव

दूसरी सामग्री जो कि ग्लूटेन आटे को प्रभावित करती है वह है नमक । नमक ग्लूटेन नेटवर्क को और भी अधिक मजबूत बनाता है । नमक आटे को लोचदार बनाता है तथा आखिर में बनने वाली ब्रेड के स्वाद को भी बढ़ाता है ।

अब इस नेटवर्क का फुला हुआ तथा उठा हुआ होना जरूरी होता है । यह काम करता है यिस्ट यानी कि खमीर । इसमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो कि आटे में मौजूद स्टार्च को शर्करा में तोड़ देते हैं ।

ग्लूटेन के आटे में कौन-कौन से एंजाइम होते हैं ?

सबसे पहले ईस्ट एमाइलेज एंजाइम का इस्तेमाल करते हुए इस टॉर्च को माल्टोज में तोड़ देता है । उसके बाद में मालटेज एंजाइम द्वारा माल्टोज को गुलकोज में परिवर्तित कर दिया जाता है ।

ग्लूकोज लिस्ट के लिए भोजन का काम करता है । फिर यह चया अपचया प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड और इथेनॉल बनाता है ।

ब्रेड का रंग भूरा क्यों होता है ?

इस प्रक्रिया के दौरान बनी सभी शर्करा का इस्तेमाल यिस्ट द्वारा नहीं किया जाता है । बल्कि यह बेकिंग की दूसरी रासायनिक प्रक्रियाओं में परिवर्तित हो जाती है । ब्रेड का भुरा रंग इसी प्रक्रिया का नतीजा होता है ।

ब्रेड पैक होने की प्रक्रिया के दौरान इथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकल जाती है । कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलने से पहले आटे के अंदर छोटे-छोटे बबल यानी कि छिद्र बना देती है आटे को जितना ज्यादा गुंथा जाता है तब कार्बन डाइऑक्साइड और इससे बनने वाले बबल भी ज्यादा बनते हैं ।

ब्रेड में ज्यादा बबल बनाने के लिए क्या किया जाता है ?

जो कि ब्रेड को फूला हुआ बनने में मदद करते हैं । समय बचाने और अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड बनाने के लिए कई बार बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है ।

इन दोनों में ही सोडियम बाई कार्बोनेट पाया जाता है । जो कि हम अमलीय अवस्था में टूटकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है ।

ग्लूटेन फ्री ब्रेड कैसे बनाया जाता है ?

अब हम जानेंगे कि ग्लूटेन फ्री ब्रेड कैसे बनाते हैं । क्योंकि बिना ग्लूटेन के तो ब्रेड चिपकीसी बनती है । इसके लिए ग्लूटेन फ्री आटा का प्रयोग किया जाता है । जैसे कि चावल का आटा ग्लूटेन फ्री आटा होता है ।

चावल के आटे में जेनथेन गम का इस्तेमाल किया जाता है । यह विशेष जीवाणु द्वारा उत्पादित पॉलिसैकेराइड है । जोकि ग्लूटेन को एक समान लचीलापन प्रदान करता है ।‌

ब्रेड बनने के बाद में यदि इसे समय पर ना खाया जाए तो यह बासी होना शुरू हो जाता है । ऐसा नमी की कमी के कारण नहीं होता है बल्कि इसका स्टार्च के क्रिस्टलीकरण और समय के साथ कठोर होने की वजह से होता है ।

प्रयोगों में पाया गया है कि 7 डिग्री सेल्सियस पर रखी गई ब्रेड 1 दिन में उतनी ही बासी हो जाती है जीतने की 30 डिग्री सेल्सियस पर बाहर रखी ब्रेड 6 दिन में बासी होती है ।

यदि आप भी फ्रिज में ब्रेड को स्टोर रखते हो तो उसकी बासी होने की प्रक्रिया को और अधिक बढ़ा देते हो । इसलिए ब्रेड को कभी भी फ्रीज में नहीं रखना चाहिए ।

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