काली मिर्च के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी

काली मिर्च के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी । काली मिर्च का इतिहास ।

जानिए काली मिर्च को क्यों किंग ऑफ स्पाइस कहते है ।

आज हम हमारे भोजन में शामिल होने वाली काली मिर्च की अजीब कहानी के बारे में जानेंगे ।
इसके इतिहास के बारे में और उसके गुणों के बारे में तथा उत्पत्ति के बारे में विस्तार से जानेंगे । जानिए काली मिर्च को क्यों किंग ऑफ स्पाइस कहते है ।

काली मिर्च हमारे भोजन का सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाती है बल्कि यह बहुत सारी बीमारियों के इलाज में भी प्रयोग की जाती है ।

यह बात उस समय की है जब सूर्य पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और पृथ्वी का निर्माण हो रहा था जब महान वैज्ञानिक चरक , अल्बर्ट आइंस्टीन भी पैदा नहीं हुए थे ।

इसी मौसम के दौरान पृथ्वी पर पनप रहा था यह अनोखा पौधा । यह पौधा सदाबहार पेड़ों के बिच तथा ऊंचे ऊंचे पेड़ों के बीच में पनप रहा था । इस पौधे का नाम जिसकी हम बात कर रहे हैं वह काली मिर्च है ।

काली मिर्च ने गोल घुमाई दुनिया । विज्ञान की दुनिया में जितना मशहूर है सेव कुछ ऐसा ही है काली मिर्च का विश्व के इतिहास में अपना दबदबा । मानव की सभ्यता पर इसका बहुत ज्यादा तथा विशेष प्रभाव रहा है ।

काली मिर्च को काला सोना भी कहा जाता है । इसके लिए कई युद्ध तथा लड़ाइयां लड़ी गई है । इसी मसाले के कारण बहुत सारे महाद्वीपों की खोज हुई है । इस मसाले के कारण कई समुद्री यात्राएं हुई तथा कई देश गुलाम भी हुऐ ।

भारत का पश्चिमी घाट काली मिर्च की जन्मस्थली

इस मसाले की महक तथा स्वाद ने प्राचीन समय से ही मानव सभ्यता को अपनी और मोहित किया है । देश के पश्चिमी घाट पर काली मिर्च की खेती खूब होती है । इसे काली मिर्च की जन्मस्थली भी कहा जाता है ।

काली मिर्च मसाले की उपज के लिए नामी गर्मी तथा आदर मौसम होना जरूरी होता है इसी मौसम में काली मिर्च मसाला की पैदावार होती है ।

ऐसा मौसम तो भारत की बेंगलुरु राज्य मैं ही हो सकता है जहां पर इस काली मिर्च की खेती होती है ।काली मिर्च की यात्रा की शुरुआत होती है बेंगलुरु से 30 किलोमीटर दूर moodabidei ।

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काली मिर्च का पेड़ होता है या बेल । काली मिर्च किस पेड़ के लगती है ?

बहुत सारे लोगों के दिमाग में यह कंफ्यूजन हमेशा बना रहता है कि काली मिर्च आखिरकार में लगती किसके है । क्या काली मिर्च का कोई पेड़ होता है या फिर काली मिर्च बैल के लगती है ।

असल में काली मिर्च का पेड़ नहीं होता है । काली मिर्च की बेले होती है जो कि किसी अन्य पेड़ों के सहारे लिपटी हुई रहती है और वे उन पेड़ों पर उनके सहारे चढ जाती है ।

इस बैल के बड़े बड़े पत्ते होते हैं और इन पत्तों के बीच में मोतियों के जैसे काली मिर्च के गुच्छे होते हैं । यही गुच्छे काली मिर्च के होते हैं । यह गुच्छे सख्त हरे तथा अंगूर के गुच्छे की तरह होते हैं ।

वनस्पति शास्त्र में काली मिर्च का नाम क्या है ?

वनस्पति शास्त्री यों के लिए इसका नाम piper nigrum है । काली मिर्च का पौधा piperaceae Family का सदस्य है । संस्कृत में काली मिर्च को pippali यानी की बेरी ( Berry ) फल कहा जाता है ।

काली मिर्च का जन्म कहां हुआ ? भारत में काली मिर्च कहां उत्पादित होती है ?

काली मिर्च का जन्म भारत के केरल राज्य में हुआ है । काली मिर्च देश के तीनों दक्षिणी राज्यों में होती है। यह केरल , तमिलनाडु तथा कर्नाटक राज्य में पैदा होती है ।

काली मिर्च की बुवाई कब की जाती है ?

Malenadu को पहाड़ियों की धरती भी कहा जाता है । Malenadu कर्नाटक राज्य के अंतर्गत आता है । जनवरी के महीने में कुछ दाने लाल लाल हो जाते हैं । जो कि तोड़ने के लायक हो जाते हैं सारे के सारे काली मिर्च के दानों को हाथों से तोड़ा जाता है ।

इस समय वातावरण में ताजी कटि काली मिर्च की खुशबू छाई हुई रहती है । यहां के किसान काली मिर्च को तोड़ने में लगे हुए रहते हैं । एक शाखा पर करीबी 30 काली मिर्च के गुच्छे होते हैं ।

काली मिर्च को पेड़ों से कब तोड़ा जाता है ?

काली मिर्च के इस फल को पकने से पहले ही तोड़ना जरूरी होता है । लेकिन इसे तब तोड़ा जाता है जब वह बड़ा हो गया हो । छोटे दानों को नहीं तोड़ा जाता है ।

यदि काली मिर्च का दाना पक जाता है तो इसका तीखापन कम हो जाता है । इसीलिए इसे पकने से पहले ही तोड़ा जाता है ।

काली मिर्च की एक बेल से कितनी काली मिर्च की पैदावार होती है ?

प्रत्येक बेल से करीब 100 किलो काली मिर्च लगती है । अगले 3 महीने तक काली मिर्च इसी तरह तोड़ी जाती है । काली मिर्च को तोड़ना कोई आसान काम नहीं होता है ।

क्योंकि काली मिर्च की बेले पेड़ों से लिपटी हुई ऊपर तक होती है । इसलिए पेड़ों पर चढ़कर इन्हें तोड़ना होता है ।

प्राचीन समय का दुर्लभ मसाला काली मिर्च

एक समय ऐसा था जब काली मिर्च इतनी दुर्लभ थी कि इसे सोने के समान तोला जाता था । इतनी दुर्लभ थी कि सिर्फ रईस लोगों के पास ही उपलब्ध होती थी तथा रईस लोग ही इसका स्वाद और सुगंध को जानते थे ।

उस समय काली मिर्च के दाने एक-एक करके गिने जाते थे तथा सिक्खों की तरह काम आते थे । काली मिर्च की मात्रा ही यही तय करती थी कि वह कितना रईस है ।

काला सोना थी काली मिर्च

किराया तथा दहेज काली मिर्च के रूप में दिया जाता था । फ्रांस में तो करीब 4.30 सौ ग्राम कालीमिर्च किसी भी गुलाम को आजाद कर देती थी ।

पांचवी शताब्दी में हंस साम्राज्य के अटीला ( Attila The Hun ) ने रोम पर कब्जा कर लिया था । तब फिरौती के रूप में 3000 पाउंड काली मिर्च मांगी । कुछ ऐसी थी काली मिर्च की कीमत और चाहत ।

काली मिर्च की खोज यात्रा की शुरुआत

फिर आया खोज का युग समुद्री यात्राओं का युग । स्पेन के राजा और रानी ने क्रिस्टोफर कोलंबस को काली मिर्च की भूमि खोज निकालने का आदेश दिया । कोलंबस का बेड़ा पश्चिम की ओर निकला और पहुंचा अमेरिका ।

वास्कोडिगामा का भारत में आना एक उपलब्धि

जबकि पुर्तगाली शासक वास्कोडिगामा ने चुना अलग रास्ता । अफ्रीका के पश्चिमी छोर के पास से गुजरा । लेकिन वे निराश हो गए । आखिर में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वह कालीकट पहुंच ही गए ।

वास्कोडिगामा यदि भारत पहुंचे नहीं होते तो भारत का इतिहास बहुत ही पुराना होता । यह एक ऐसा मसाला है जो कि भारत तथा बहुत सारे अफ्रीकी देशों की गुलामी का कारण भी बना ।

 काली मिर्च एक समय कहलाती थी काला सोना

काली मिर्च कैसे बनती है ?

जब काली मिर्च के दाने पके हुए नहीं होते हैं तब वह हरे तथा लाल रंग के होते हैं और इन्हें पकने से पहले ही तोड़ लिया जाता है । ताजे तोड़े गए गुच्छे में से फिर दोनों को अलग अलग किया जाता है ।

काली मिर्च के प्रत्येक गुच्छे में से करीब 40 से 50 दाने निकलते हैं । काली मिर्च के दानों को हाथों से पैरों से तथा मशीनों से अलग-अलग तरीकों से अलग अलग निकाल कर के इकट्ठा किया जाता है ।

जब यह दाने हरे होते हैं तब यह चिकने होते हैं तथा इनमें नमी होती है । इसलिए इन्हें सुखाना जरूरी होता है । यदि सुखाते नहीं है तो नमी के कारण यह खराब हो जाते हैं ।

काली मिर्च के इन हरे दानों को 1 मिनट के लिए उबलते हुए पानी में रख दिया जाता है । उसके बाद में इसे निकाल लिया जाता है । जब इन्हें उबलते पानी में रखा जाता है

तब इतनी ही देर रखा जाता है कि अंदर का दाना गर्म नहीं होना चाहिए । सिर्फ बाहर का ही हिस्सा गर्म होना चाहिए । इसीलिए इसे 1 मिनट से ज्यादा पानी में नहीं रखा जाता है ।

यदि काली मिर्च के ऊपर का हरा छिलका कम होता है तो काली मिर्च का यह दाना बहुत जल्दी ही सूख जाता है । यदि हरा छिलका ज्यादा होगा तो सूखने में समय भी ज्यादा लगेगा ।

काली मिर्च का छिलका काली मिर्च के साथ चिपक जाता है । जिससे कि इनमें सवाद तथा मेहक और भी ज्यादा बढ़ जाती है । फिर इसे धूप में सुखा दिया जाता है ।

सफेद मिर्च कैसे बनाई जाती है ? सफेद मिर्च बनाने की विधि

सफेद मिर्च भी इन्हीं दानों से बनती है । कुछ दिन सड़ने के लिए छोड़ा जाता है । जिससे कि छिलका हट जाता है । फिर इसे खूब अच्छी तरह से धोया जाता है । धोने के बाद में इसे धूप में सुखाया जाता है और वह बन जाती है सफेद मिर्च ।

1 . काली मिर्च हो या फिर सफेद मिर्च हो दोनों के छिलके सुखते सुखते मोटे हो जाते हैं उनमें झुरियां पड़ जाती है ।

2 . 100 किलो काली मिर्च के 3 दानों से करीब 35 किलो सुखी काली मिर्च प्राप्त होती है । काली मिर्च के वह दाने जिसमें है तीखापन ।

3 . रसोई में आलू की सब्जी में तो काली मिर्च हीरोइन की तरह काम करती है । बहुत सारी ऐसे भारतीय रेसिपी है । जिसमें काली मिर्च तो डाली ही जाती है । इनके बगैर यह खाना अधूरा होता है ।

4 . भारतीय मसालों में यदि काली मिर्च ना हो तो ऐसे लगता है कि बिना दुल्हन वाली शादी के समान लगता है ।

काली मिर्च तो इतिहास के पन्नों में पहले से ही लिखी जा चुकी है । Ramesses दितीय के संरक्षित शव यानी कि उसकी मम्मी में काली मिर्च के दाने मिले थे ।

चिकित्सा के जनक हिप्पोक्रेट्स बहुत सारे रोगों के उपचार के लिए काली मिर्च का उपयोग करते थे । वैसे बहुत सारे रोगों की दवा मानते थे । सर्दी जुकाम से लेकर किसी जहर के तोड़ के रूप में भी इसे काम में लेते थे ।

आयुर्वेद की रीढ़ माना जाता है काली मिर्च को

आयुर्वेद में अनगिनत दवाओं के रूप में इस दवा को अन्य दवाओं के साथ मिलाकर के काम में लिया जाता है । आयुर्वेद का मुख्य मसाला माना जाता है काली मिर्च को । आयुर्वेद की रिड्ढ भी मानी जाती है ।

काली मिर्च का प्रभाव गरम तथा तिखा होता है । भारत में करीब 500 साल पूर्व मसालों में सिर्फ काली मिर्च ही एक ऐसा मसाला था जो कि शामिल था ।

इन मसालों का पारंपरिक उपयोग देश के प्रत्येक घर में मिल जाता है । रसोई में इस मसाले का खूब प्रयोग किया जाता है । यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहता है ।

काली मिर्च का उपयोग एक दवा के रूप में

1 . गुड़ तथा काली मिर्च का मिश्रण रामबाण मिश्रण माना जाता है । यदि किसी के पेट में दर्द हो तो काली मिर्च को गर्म पानी के साथ में ले लेना चाहिए ।

2 . काली मिर्च गुड तथा गर्म पानी को साथ में मिलाकर लेने से डकार आती है और पेट भी हल्का हो जाता है । इसमें स्वाद के साथ शहत के गुण भी छिपे होते हैं ।

3 . जब भारतीय पापड़ बनाते हैं जो कि उड़द दाल के होती है । उसमें यदि काली मिर्च ना डालें तो इसका स्वाद ही कुछ अलग ही होता है ।

4 . जब काली मिर्च को इसमें डाला जाता है तब इनमें मौजूद भारी प्रोटीन आसानी से हजम हो जाता है । यह सिर्फ काली मिर्च की वजह से ही हो पाता है ।

काली मिर्च तिखि क्यों होती है ? काली मिर्च के तीखा होने का कारण क्या है ?

दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में काली मिर्च के रसायनों पर खोज चल रही है । काली मिर्च को तिखा बनाता है उसमें मौजूद एक विशेष मॉलिक्यूल जिसका नाम piperine है ।

काली मिर्च के कुल वजन का 5% से 10% वजन इसी मॉलिक्यूल के कारण होता है । piperine ही काली मिर्च को देता है महक स्वाद तथा गुण । इसी के कारण काली मिर्च में मौजूद होते हैं यह विशेष गुण ।

काली मिर्च के कारण हमें छींक क्यों आती है ?

piperine एक हल्का तथा वाष्पशील मॉलिक्यूल होता है । यह तेजी से हवा में फैलता है तथा नाक में गुदगुदी करता है जिसके कारण हमें छींक आती है ।

काली मिर्च कीटाणु नाशक तथा एंटीऑक्सीडेंट होता है । यह सूजन को कम करने का काम भी करती है । यह हमारे शरीर में पाचक रस को बढ़ाती है तथा पाचन क्रिया को ठीक करने का काम भी करती है ।

हमारे शरीर की पाचन प्रणाली भोजन का विघटन करती है तथा फिर उसमें विघटित हुए भोजन का अवशोषण करती है तथा हानिकारक तत्वों को बाहर निकाल देती है ।

वैज्ञानिकों को पता चला है कि जब खाने में काली मिर्च होती है तब वह खाना जल्दी से भी घटित नहीं होता है । जिसके कारण से अधिक समय तक शरीर के अंदर रुक पाता है ।

पाइपरीन हमारे शरीर में खाने को अधिक से अधिक समय तक रोके रखने का काम करता है । यह दवाई को भी अधिक से अधिक समय तक अपने शरीर में रोके रखने का काम करता है ।

जिससे की संभावना बनती है कि आने वाले समय में इसका उपयोग दवाई में भी किया जाने लगे ।

काली मिर्च से जुड़ी एक अनोखी कहानी

काली मिर्च की अनेक कहानियों में से एक कहानी यह भी है कि जब पुर्तगाल में व्यापार जोरों पर था तब काली मिर्च का व्यापार सिर्फ भारत में ही था ।

उस समय कुछ लालची व्यापारी काली मिर्च के पौधे उखाड़ने लगे । घबराए हुए किसान दौड़े-दौड़े अपने राजा के पास गये । तब कालीकट के राजा ने कहा कि इसे ले जाने दो । क्या यह पुर्तगाली हमारे मानसून की आखिरी फुंहार को ले जा सकते हैं ।

क्या वह हमारी मिट्टी ले जा सकते हैं । क्योंकि मानसून के बिना तथा केरल की मिट्टी के बिना काली मिर्च कैसे उग सकती थी ।

पश्चिमी घाट पर नमी आद्रता तथा गर्मी यह तीनों पाए जाते हैं । यहां की मिट्टी ना तो सूखी होती है तथा ना ही कीचड़ भरी होती है बरसाती मौसम यहां पर चलता रहता है

काली मिर्च के पौधों को उसी तरह का मौसम चाहिए होता है इन पौधों की जड़ें गहरी नहीं होती है बहुत कम गहरी होती है यह जड़ें धरती से पोषण को खींचने वाली होती है

काली मिर्च के फूल बालियों में निकलते हैं बरसात की बूंदे तथा गुरुत्व के कारण इनमें होता है परागण । करीब 8 से 9 महीने के बाद काली मिर्च के दाने लगने लगते हैं । काली मिर्च की तेजी तथा आकार मिट्टी तथा मौसम दोनों पर ही निर्भर करता है

इंसान ने काली मिर्च की खेती करीब 6.50 हजार साल पहले ही शुरू कर दी थी । किसी जंगली पूर्वज से चुना गया था पौधा । काली मिर्च की बेल को कटिंग करके कलम के द्वारा लगाया जा सकता है ।

काली मिर्च के पौधे की यानी की बेल की खासियत यह होती है कि इसमें पहले पत्तियां आती है तथा फिर इसमें जड़ आती है ।

देश के 120000 हेक्टेयर में काली मिर्च की खेती होती है हर साल करीब 65000 टन काली मिर्च का उत्पादन किया जाता है ।

काली मिर्च की उन्नत किस्मों के नाम

काली मिर्च की बहुत सारी उन्नत किस्में हैं जिनको लगा कर के आप अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हो

1 . Girimunda
2 . Sreekara (ks 14 )
3 . Thevam
4 . Pournami
5 . subhakara

काली मिर्च की अनेकों किस्में मौजूद हैं । हर किस्में की एक अपनी ही पहचान तथा खूबी होती है । काली मिर्च की कुछ किस्में के फल जल्दी लगते हैं तो कुछ किस्मों के फल देरी से लगते हैं ।

कुछ किस्मों की जड़ें गहराई तक जाती है तो कुछ किस्मों का स्वाद तीखा होता है । सब किस्में अपने में एक अलग ही जेनेटिक कोड छिपाऐ हुए हैं ।

Bush Pepper काली मिर्च की एक ऐसी नस्ल है जिसे आप गमले में अपने घर पर भी लगा सकते हो । इसकी जड़ें कम गहराई तक जाती है । यह किस्में पूरे साल फल देती है ।

Column pepper इस नस्ल को पेड़ों के तनो के सहारे ना उगा करके किसी खंभे के सहारे भी उगाया जा सकता है । इन खंभों के अंदर पोषण भरा होता है । इसमें फल जल्दी लगती है तथा तोड़ना भी आसान होता है ।

करीब 12000 टन काली मिर्च भारत से दूसरे देशों को निर्यात की जाती है । विदेशी पूंजी के रूप में करीब 780 करोड रुपए की रकम तक पहुंच जाती है । यह अंतर्राष्ट्रीय मसाला व्यापार का एक चौथाई हिस्सा है ।

हम में से प्रत्येक की जिंदगी में काली मिर्च का एक अपना हिस्सा होता है । किसी के लिए यह स्वाद होता है तो किसी के सेहतमंद के लिए यह जरूरी होती है ।

मसालों की से राजा काली मिर्च का अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में काफी महत्वपूर्ण योगदान है। यह हमारी देश की अर्थव्यवस्था को तो मजबूत करती ही है। साथ में हमें सेहत भी प्रदान करती है।