स्वंय सम्मान क्या है? और ये सफलता के लिए क्यो जरूरी है

Self-respect in hindi आज हर उस व्यक्ति को मजबूत आत्मसम्मान की जरूरत है जो जीवन में सफल होना चहाता है । ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान होने से आप जिंदगी के हर पहलू में मास्टर बन जाएगे । आपके रिश्ते बेहतर बन जाएगे, आत्मविश्वास बढ़ जाएगा, उत्पादक क्षमता बढ़ जाएगी, और समाजिक जीवन बेहतर बन जाएगा ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान होने से व्यक्ति आतंरिक प्रेरणा से भर जाता है ।

कई बडे दार्शनिक और महान नेता कहते है की आतंरिक प्रेरित व्यक्ति ही सफल होता है । वैसे तो आत्मसम्मान ( Self-respect ) और सेल्फ-एस्टीम दो अलग चीजों है लेकिन ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । आत्मसम्मान का मतलब होता है खुदकी इज्जत करना, हर परिस्थिति और हालात में मजबूत चरित्र का परिचय देना, जबकि सेल्फ-एस्टीम का मतलब है ।

आप खुदकों कितना पसंद करते हैं । आप अपने शरीर, भावनाओ, और लक्ष्यों के प्रति कैसी कैसा महसूस करते हैं ।

वही Self-esteem कहलाता है । जैसा की मेने पहले कहा आत्मसम्मान और सेल्फ-एस्टीम आपस में जुडे हुए हैं क्योकि आप खुदको जितना पसंद करते हैं, उतना ही आपका सेल्फ-एस्टीम हाइ होता है जितना सेल्फ एस्टीम हाइ होता है उतना ही आत्मविश्वास बढ़ा हुआ होता है । और जितना हाइ आत्मविश्वास ( Confidence ) होता है उतना ही ज्यादा पकड हमारी लाइफ के हर क्षेत्र पर होती है ।

कई अध्ययनों मे भावनाओ और उत्पादक क्षमता में सम्बन्ध को दर्शाया हैं । ऊँचे आत्मसम्मान वाला व्यक्ति दृढ़ विश्वासी, सहनशील, जिम्मेदारीयां कबूल करने वाला, बेहतर रिश्ते वाला और कढ़े स्वंय-अनुसाशन वाला होता है ।जबकि नीचे दर्जे के आत्मसम्मान वाला निराशावादी, शर्मीला, नकारात्मक, दोष लगाने वाला और कमजोर इच्छाशक्ति वाला होता है ।

क्योकि सेल्फ-एस्टीम हमारे लाइफ के हर हिस्से पर असर डालता है इसलिए इसका सफलता हासिल करने में बहुत महत्व है । Self-esteem का महत्व Success में समझने के लिए हम आपको एक कहानी बताते हैं । आत्म सम्मान का महत्व~ कहानी एक भिखारी रेलवे स्टेशन पर बैठ कर कुछ पेंसिलों और कटोरे के साथ भीख माँग रह था । वहा से एक युवा अधिकारी गुज़र रहा था ।

उस अधिकरी नें भीखारी की टोकरे में कुछ पैसे ठाले और आगे चल दिया । वो डिब्वे में बैठने ही वाला लेकिन दोबारा भीखारी की तरफ लौटा उसनें अपनी मुठ्ठी में कुछ पेंलिलें ली और कहा “मैं कुछ पेंसीलें लूगाँ, क्योकि इनकी कीमत है अखिरकार तुम एक व्यापारी हो और मैं भी” । इसके बाद वो अधिकरी वहाँ से चल दिया 6 महीने बाद वो अधिकारी किसी पार्टी में था उसी पर्टी में वो भीखारी भी सूट और टाई पहने हुए मौजूद था ।

भीखारी ने अधिकारी को देखते ही पहचान लिया, वो उसके पास गया और बोला, आपने शायद मुझे पहचाना नही लेकिन मैं आपको पहचानता हूँ, उसने 6 महीने पुरानी घटना के बारे में अधिकारी को विस्तार से बताया, अधिकारी बोला “हाँ मुझे अब कुछ-कुछ याद रहा है,

तुम उस पेंसिलों और कटोरे के साथ भीख माँग रहे थे लेकिन तुम यहाँ क्या कर रहे हो? भीखीरी ने उत्तर दिया “आप शायद नही जानते आपने उस दिन मेरे लिए क्या किया, उस दिन आपने मुझे भीख ना देकर मेरे साथ तमीज से पेश आए

। आपने पेसिंले उठाकर कहा था, “इन पेसिंलो की कीमत है । तुम एक व्यापारी हो और मैं भी” इन वाक्यों नें मेरे अन्दर आन्दोलन शुरू कर दिया, मेैं खुदसे पूछने लगा की मैं भीख क्यो माँग रहा हूँ, मेने अपनी जिंदगी सुधारने के लिए कोई पहल क्यो नही की? मेने अपना झोला उठाया और दिनो-रात जिंदगी में आगे बढ़ने मेहनत करनी शुरू कर दी और आज मैं यहाँ खड़ा हूँ

। मेरा सम्मान लौटाने के लिए धन्यवाद उस खडना ने मेरा जीवन बदल दिया । उस अधिकरी ने पता है भिखारी के लिए क्या किया? उसने उस भीखारी का आत्मसम्मान बढ़ा दिया

आत्मसम्मान बढ़ने से उस भीखारी की खुदकी नज़रो में इज्जत बढ़ गई जिसकी वजह से उसके लिए भीख माँगना बहुत मुश्किल हो गया । जिसके कारण उसे अपने आत्मसम्मान के बराबर काम ढूँढ़ना पडा । तो आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएगे आत्मसम्मान कैसे बढ़ाए ( Self-esteem or self-respect kaise badhaye )

आत्मसम्मान कैसे बढ़ाए ( Self-respect in hindi

 

Self-respect in hindi
Self-respect in hindi

 

लेकिन याद रखिये ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान होने का मतलब अहंकार नही है । अहंकार उँचे दर्जे के बिल्कुल विपरीत है बल्कि अहंकार घटिया दर्जे के आत्मसम्मान की निशानी है । यहाँ आपको कुछ तरीके बता रहे हैं जिससे आप ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान ( Self-esteem ) विकसित कर सकते है ।

*. 1~ आतंरिक प्रेरणा से काम करिये *

कोई आदमी सुबह उठता है, और उठते ही मुझे कॉल कर के कहता है की आप बहुत अच्छे है, आपके कारण मेरी जिंदगी बदल गई, और आप बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं । तब मुझे कैसा महसूस होगा? जाहिर सी बात है मैं बहुत अच्छा महसूस करूगा ।

लेकिन वही आदमी अगले दिन मुझे दोबारा कॉल कर के कहता है “तुम बहुत ही कमीने इंसान हो, तुम एक नम्बर के धोखेबाज़ हो, और तुम इस शहर के सबसे नीच आदमी हो, तो मुझे उस आदमी की बातों को सुन कर कैसा लगेगा? जाहिर है मुझे बहुत बुरा लगेगा तो मेरी भावनाओ को कौन कन्ट्रोल कर रहा है? साफ बात है वही आदमी कन्ट्रोल कर रहा है क्योकि उसकी अच्छी बातों से मुझे खुशी मिलती है और बुरी बातों से मैं दुखी हो जाता हूँ ।

अगर मैं उस आदमी की अच्छी और बुरी बातों पर React करता हूँ तो मैं एक बाहरि प्रेरित व्यक्ति हूँ । लेकिन मैं ऐसा नही करता, मुझे मालूम है की मैं एक इंसान हूँ और हर इंसान में अच्छे और बूरे दोने दोनो तरह के गुण होते हैं । इसलिए जब उस आदमी ने मुझे पहली दिन कॉल करी होती तो मुझ पर कोई फर्क नही पडता क्योकि मैं पहले से ही अपने नज़रो में ऊँचा हूँ, और जब उसने मुझे दूसरी बार कॉल करी होती तब भी मेरा कोई रीएक्शन ( Reaction ) नही होता |

क्योकि उसकी बातें मुझे थोडी बुरी जरूर लगती लेकिन वो मुझे नीचा महसूस नही करा पाता, क्योकि मैं फिर भी अपनी नज़रो में अच्छा इंसान होता । इसी को आदरूनी प्रेरित होना कहते है । इसकों अच्छी तरह समझने के लिए मैं आपको एक कहानी बताता हूँ…….. प्राचीन भारत में एक महात्मा थे ।

वो किसी गाँव से गुज़र रहे थे । उस रास्ते में एक आदमी उन्हे पूरे रास्ते गाली वक्ता रहा, वो आदमी उनको तब तक गालियां सुनाता रहा जब तक की वो पूरी तरह थक नही गया जब वो आदमी थक कर बैठ गया तब उन महात्मा ने उस आदमी से कहा “जब कोई शख्स आपको कुछ दे, और उसे न लो, तो वो चीज किस के पास रहेगी? उस आदमी ने जबाव दिया “देने वाले के पास” महात्मा ने कहा “मै भी तुम्हारे वचन ( शब्द ) नही लेता हूँ” और वो उस आदमी को वही हक्का-वक्का छोड़ गए |

उन महात्मा में इतनी सहनशीलता इसलिए थी क्योकि वो अदरूनी प्रेरित थे । इसलिए ऊँचे दर्जे के आत्मसम्मान के लिए आदरूनी प्रेरित होना जरूरी शर्त है ।

*. 2~ अपनी कमजोरी को ताकत मे बदलिये *

सफलता वो लोग हासिल नही करते जो कमफर्ट में होते है और न ही तभी सफलता हासिल की जा सकती है जब हमें किसी प्रकार की दिक्कत न हो । बल्कि जिंदगी में कामयाब होने के लिए तीव्र इच्छाशक्ति ( Burning desire ) की जरूरत होती है ।

इसका मतलब ये नही है की जिन लोगो को किसी प्रकार की परेशानी नही होती वो सफल नही हो सकते नही ! मेरे कहने का मतलब है की इंसान को मुश्किलें कभी सफल होने से नही रोक सकती । एक महान आदमी ने कहा था “रूकावटे केवल मानसिक हैं, असलियत में कोई रूकावट ही नही है और इस बात के सबूत हमें दूनिया भर में देखने को मिलते हैं । जैसे- दुनिया को सबसे सर्वश्रेष्ठ संगीत देने वाले बीथोवान बहरे थे ।

प्राकृति के ऊपर सर्वश्रेष्ठ कविताए लिखने वाले मिल्टन अंधे थे । फ्रैकलिन डी. रुज़वेल्ट अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति और दूनिया के महान नेताओ में से एक थे । उनकी कमजोरी थी कि वो चल-फिर नही सकते, वो अपना पूरा काम वीलचयर पर करते थे | विल्मा रूडोल़्फ दुनिया की सबसे तेज धाविक बनना चहाती थी लेकिन उनकी कमजोरी थी की उन्हे पोलिया था ।

लेकिन सारी कमजोरीयों को दूर करते हुए विल्मा ने पोलिया होते हुए दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गई और इतिहास रच दिया । इस लिये ऊँचे आत्मसम्मान बढ़ाने के लिए ये मत सोचिये की अक्षमताए हमें रोक सकती हैं । बल्कि ये तो खुदमें सुधार करने का रास्ता तैयार करती हैं ।

*. 3~ ऊँचे चरित्र वाले लोगो के साथ रहिये *

हम जिन लोगो के साथ रहते हैं, उनका हमारे चरित्र पर बहुत गहरा प्रभाव पडता है । कई अध्ययनों मे ये बात सामने आई है की हम जिन पाँच लोगो के साथ सबसे ज्यादा समय बिताते है, उनके जीवन का औसत हमारा जीवन हो जाता है । मतलब की उनके स्वास्थ्य का औसत हमारा स्वास्थ्य हो जाएगा और उनके रिश्तों की गुणवक्ता का औसत हमारा हो जाएगा । इसलिए दोस्तो को होशियारी से चुनिये ऐसे लोगो को दोस्त बनाईये जो मजबूत चरित्र और आत्मसम्मान वाले हों ।

*. 4~ स्वंय अनुसाशन में रहिये *

जब आत्मअनुशासन ( Self-discipline ) की बात आती है तो लोग समझते है कि इससै उनकी आजादी छिन जाईगी लेकिन इच्छाओ को पूरा करने वाला आदमी कभी संतुष्ट नही रहता क्योकि इच्छाए कभी खत्म नही होती । संतुष्ट वही आदमी रहता है जो अपनी इच्छाओ पर काबू कर लेता है ।

स्वंय-अनुशासन हमें अपने ऊपर काबू करने की शक्ति देता है और सफलता हासिल करने में मदद करता है जब हम खुदको अच्छी तरह अनुशासित कर पाते है ।तो हमारा सेल्फ-कॉन्फिडेन्स बढ़ जाता है । जिससे सेल्फ-एस्टीम बढ़ता है ।

*. 5~ सेल्फ-टॉक पर काबू रखिये *

सेल्फ-टॉक ( Self-talk ) का मतलब है जो आप अन्दर ही अन्दर खुदसे बात करते रहते हैं । सेल्फ-टॉक हर समय हमारे अन्दर चलती रहती है । सेल्फ-टॉक हमारे भावनाओ और Actions को प्रभावित करती है ।

For examaple कोई व्यक्ति नौकरी के लिए इन्टरव्यू में गया, वहा उसका सिलेक्शन नही हुआ, तो अगर वो नकारात्मक सेल्फ-टॉक ( Nagitive self-talk ) तो उसकी सेल्फ-टॉक कुछ इस तरह होगी “मै उस जॉव के लियाक ही नही हूँ, मेरी शक्ल अच्छी नही है, शायद मुझे कभी कोई नौकरी नही मिलेगी” वही अगर कोई पॉजिटिव सेल्फ-टॉक वाला आदमी होगा तो वो कुछ इस तरह वोलेगा “वो जॉव ही मेरे लायक नही होगी, क्योकि ऊपरवाले ने मेरो लिए इससे बेहतर जॉव ढूँढ़ रखी है ।

इस तरह शब्दो में थोडी फेर बदल कर के नकारात्मक सेल्फ-टॉक को सकारात्मक सेल्फ-टॉक में बदला जा सकता है । सेल्फ-टॉक को सकारात्मक करने से आपका दुनिया और खुदके प्रति नजरिया बिल्कुल बदल जाएगा जिससे आत्मसम्मान और सेल्फ कॉन्फिडेन्स बढ़ेगा ।

*. 6~ उन लोगो की मदद करिये जो बदले में कुछ नही दे सकते *

डा० कार्ल मेनिंचर दूनिया के सबसे महशूर मनोचित्सिकों में से एक हैं । उनसे एक दफा पूछा गया था की उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए जिसका नर्वस व्रिकडाउन होने वाला हो, सभी दार्शाकों को उम्मीद थी कि कार्ल मेनिंचर किसी मनोचिक्तसक के पास जाने की सलाह देगे या किसी दवा का नाम बताएगे ।

कार्ल मेनिंचर ने कहा “उस आदमी को शहर के सबसे खराब और गरीब इलाके में जाना चाहिये और जरूरतमंदो की मदद करनी चाहिए” | जरूरतमंदो की मदद कर के हम खुद के प्रति अच्छी भावनाए महसूस करते हैं । जिससे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है ।

इसलिए आपको भी इंसानीयत के नाते उन लोगो की मदद जरूर करनी चाहिये जो आपको बदले मे कुछ नही दे सकते ।

*. 7~ खुदको माफ कर दे *

हम इंसान अक्सर अपनी गलतियों से ही सीखते हैं । जो लोग गलतियां करने से खुदको रोकते हैं वो खुदको आगे बढ़ने से रोकते है । दुनिया के मशहूर विज्ञानिकों मे से एक एल्वा एडिसन ने एक बार कहा था “जिस आदमी ने कभी कोई गलती नही की, उसने कुछ नया सीखा ही नही” |

ज्यादातर लोग खुदको अपने अतीत से बाँध कर रखते हैं । उनके दिमाग से अतीत की घटनाए और यादें नकलती ही नही हैं । ऐसा कर के वो अपना ही नुकसान कर रहे है क्योकि अतीत का पछतावा करने से कभी गलतियां सुधरती नही बल्कि जो आज का समय है वो भी बर्वाद हो जाता है ।

कई रीसर्चों में ये बात सामने आई है की जो लोग अपनी गलतियों के लिए खुदको माफ कर देते है, उनके दोबारा उस गलती को करने के चांस बहुत कम रह जाते हैं और उनका खुद पर विश्वास भी बढ़ जाता है । इसलिए खुदको अतीत की गलतियों के लिए माफ कर दें ताकि आप आपना आज और भविष्य बेहतन बना सकें ।

Resource या रेफरेन्स

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निष्कर्ष

ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान बनाने के लिए अदरूनी प्रेरिक व्यक्ति बनिये और अपनी कमोजियों को ताकत में बदलिये । संगती का हमारे चरित्र पर बहुत गहरा गुप्त प्रभाव पडता है इसलिए उन लोगो के साथ रहिये जो मजबूत चरित्र तथा आत्मसम्मान वाले हों ।

स्वंय अनुशासन मजबूत चरित्र और व्यक्तित्व बनाने में मदद करता है और सफलता हासिल करने में भी मदद करता है । इसलिए स्वंय-अनुशासन का पालन करें ।

अपनी सेल्फ-टॉक को सकारत्मक रखें क्योकि जो हम ज्यादातर समय खुदसे कहते रहते है वही बन जाते है और उन लोगो की मदद करिये जो बदले में आपको कुछ नही दे सकते इससे आपको खुदके प्रति अच्छा महसूस होगा जिससे आपका आत्मसम्मान बढ़ेगा । उन गलतीयों के लिए खुदको माफ कर दिजिए जो अापने अतीत में की है इससे आपका खुद पर विश्वास बढ़ेगा और उन गलतियों को दोहराने की सम्भावना भी कम होगी ।

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