उल्लू को ऋषि कश्यप द्वारा दिया गया श्राप। ऋषि कश्यप समस्त पक्षियों के जनक क्यों है।

उल्लू को ऋषि कश्यप द्वारा दिया गया श्राप

संसार में जहां भी उल्लू रहते हैं। वहां पर सन्नाटा पसरा हुआ रहता है। और वहां का स्थान उदासीनता से भरा हुआ रहता है। जिस स्थान पर उल्लू और मनुष्य साथ साथ रहते हैं। वहां पर दुर्भाग्य और मृत्यु सहचर होते हैं। लेकिन उल्लू के साथ ऐसा क्यों होता है।

पिता अपने पुत्र को श्राप क्यों देगा ?

आखिरकार उल्लू भी तो एक पक्षी है। इसके पीछे का कारण ऋषि कश्यप द्वारा दिया गया श्राप है। और ऋषि कश्यप समस्त पक्षियों के जनक है। पिता अपने पुत्र को श्राप क्यों देगा इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है। सभी पक्षी माता कदरू की संताने है। अलग-अलग समय में माता कदरू के गर्भ से अलग-अलग पक्षी का जन्म हुआ सभी पक्षी माता कदरू के संतान है।

सभी पक्षी किसकी संतान है?

जब उल्लू माता कदरू के गर्भ में थे। तो माता का कदरू पूरे दिन सोती रहती थी माता कदरू ने पूरे गर्भकाल में दिन का प्रकाश कभी भी नहीं देखा पाता इसी प्रवृत्ति का उल्लू पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा जब उल्लू का जन्म हुआ तब उल्लू दिन में देखने मैं असक्षम थे

उल्लू केवल रात्रि काल में ही देख पाते थे लेकिन यह बात उन्होंने किसी को बताई नहीं क्योंकि उल्लू को डर था कि वह अन्य पक्षियों के बीच उपहास का कारण बन जाएंगे और इसका परिणाम यह हुआ कि उल्लू रात्रि में नहीं देख पाने के कारण वह रात्रि काल में जागरण करते थे

और दिन भर सोते रहते थे ऋषि कश्यप सब पक्षियों को ज्ञान देते थे लेकिन उल्लू पीछे बैठकर सोते रहते थे उन्होंने कभी भी किसी भी धर्म कार्य और पूजा पाठ में रुचि नहीं ली उल्लू के इस प्रवृत्ति के कारण उल्लू के पिता श्री सदा ही उनसे क्रोधित रहते थे।

और धीरे-धीरे ऋषि कश्यप के मन में यह बात बैठती चली गई उल्लू अपने धार्मिक प्रवृत्ति को छुपाने के लिए ही सोने का बहाना करते हैं।

1 दिन आश्रम में एक भव्य यज्ञ का आयोजन का था दूर-दूर से ऋषि मुनि आए थे आश्रम के सभी सदस्य उस युज्ञ में शामिल हुए और अगर उसी यज्ञ में कोई नई सम्मिलित हुआ तो वह उल्लू थे वह अपनी कुटिया में सो रहे थे उनकी अनुपस्थिति में उनके पिताश्री के क्रोधाग्नि को और भड़का दिया

उल्लू को क्या श्राप दिया गया है ?

ऋषि कश्यप सीधा उनकी कुटिया में गए और फिर ऋषि कश्यप ने उल्लू को श्राप दिया और कहा कि तुम किसी भी कार्य के योग्य नहीं रहोगे जहां भी उल्लू रहेंगे वहां पर अधर्म का वास होगा दुर्भाग्य और अपशकुन उल्लू की पहचान होगी और जहां पर उल्लू रहेंगे वहां पर दुर्भाग्य और मृत्यु वास करेगी

फिर इसके बाद उल्लू ने अपने पिता से माफी मांगी और बोला की क्षमा करो पिताश्री इसमें हमारा कोई दोष नहीं है। हमें दिन में कुछ भी दिखाई नहीं देता है। हमें रात्रि में ही दिखाई देता है। यही कारण है कि उल्लू रात्रि काल में जागते हैं और दिन में सोते हैं। फिर को अपनी गलती का एहसास हुआ

और उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारा श्राप तो वापस नहीं ले सकता हु। लेकिन तुम्हें एक वरदान जरूर दे सकता हूं। दिन में नहीं देखने की क्षमता के कारण मैं तुम्हें वरदान देता हूं। तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध कोई भी तुमसे जीत नहीं सकता है। और यही कारण है। कि उनका किसी भी जगह पर हो ना शुभ नहीं माना जाता है।

अंटार्टिका को छोड़कर उल्लू पूरी दुनिया में पाए जाते हैं।

जंगल में सबसे ज्यादा समझदार होते हैं। उल्लू होते हैं। केवल अंटार्टिका को छोड़कर उल्लू पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। इनकी 200 से भी ज्यादा अलग-अलग उल्लू बने जंगलों में कहीं भी पाए जा सकते हैं। जहां उनके बच्चे सुरक्षित छुप कर रह सके उल्लू के बच्चों को भी उल्लू कहा जाता है। उल्लू भी घोंसला बनाते है।

ताकि उसके छोटे बच्चों को तब तक अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके जब तक कि वह उड़ना और अपने दम पर शिकार करना नहीं सीख जाते ज्यादातर पक्षियों की तरह मां उल्लू के युवा बच्चों का पेट भरने के लिए शिकार करने की जरूरत होती है। ताकि वह बड़े और ताकतवर बन सके उनकी कुदरती समझदारी उनका सबसे बड़ा हथियार है।

और यह उन्हें शिकार करने में मदद करते हैं। ओर उनकी आंखें एक जगह पर फिक्स आती है। उल्लू चारों ओर देखने के लिए अपने सिर को चारों और घुमाना पड़ता है। इसलिए वह लगातार सिर को घुमाते रहते हैं। उल्लू की नजर कमाल की होती है। उनकी बड़ी आंखें अंधेरे में बहुत दूर तक देख सकती है।

जिसकी वजह से वह कहीं मीटर दूर से अपने शिकार को देख लेता है। उल्लू के सुनने की शक्ति भी बहुत जबरदस्त होती है। वह छोटी से छोटी सरसराहट को सुन सकते हैं। जिससे उन्हें पास की पत्तियां पौधों और उनके नीचे छुपे हुए शिकार का अंदाजा हो जाता है। इसके अलावा उल्लू के चौच और पंजे बहुत ही मजबूत होते हैं।

और उल्लू की सबसे अच्छी खूबी उनकी खामोशी से उड़ने की क्षमता है। जिन से आसानी से अपने शिकार के पास पहुंच जाते हैं। वह तेज धार पंजे घोसला में भोजन लाने के लिए एकदम सही है। उल्लू के लिए शिकार करने का सबसे अच्छा समय रात के अंधेरे में होता है जमीन पर घूम रहे हैं अपने शिकार को जैसे कि चूहे और छोटे जीव को आसानी से देख सकते हैं।