मनुष्य के बुड्ढे होने के क्या लक्षण है ? इंसान के बुड्ढे होने की क्या निशानियां है ?

जो इंसान इस धरती या पृथ्वी पर जन्म लेता है वह एक ना एक दिन बुड्ढा जरूर होता है । किसी भी इंसान के जीवन की यात्रा बच्चे से शुरू होकर बूढ़े तक की होती है । इंसान एक बच्चे से लेकर जवान होकर के बूढ़े होने तक का सफर तय करता है ।

इंसान जब यह सफर तय करता है तब उसको इस सफर को तय करने में करीब 100 साल का समय लग जाता है । इस 100 साल में वह अपनी आयु के अलग-अलग पड़ाव तथा चरणों से होकर के गुजरता है जो कि हमारे जीवन के अलग-अलग पड़ाव तथा काल होते हैं ।

जब इंसान का जन्म होता है तब वह बहुत छोटा होता है और उसे एक छोटे बच्चे शिशु या फिर बेबी का नाम दिया जाता है । धीरे-धीरे उसकी आयु बढ़ने लगती है और वह बच्चे से बड़ा होने लगता है ।

अब वह बच्चे से बड़ा हो करके जवान होने लगता है । अब सोचने समझने तथा कार्य करने की क्षमता में भी वृद्धि होती है । अब वह अपने आसपास के वातावरण को पहचानना तथा समझने लगता है ।

बच्चे से जब इंसान जवान बनता है तब तक वह 50 वर्ष तक की आयु पार कर जाता है । अब वह एक नौजवान हट्टा कट्टा इंसान बन जाता है । इस उम्र तक आते-आते इंसान को बहुत सारे जीवन के अनुभव हो जाते हैं ।

जवानी के बाद की जो उम्र आती है वह उम्र बुढ़ापे की होती है । जैसे जैसे इंसान बुढ्ढा होता है उसके शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं ‌। कौनसे बदलाव को पहचान करके इंसान पता लगा लेता है कि वह अब बूढ़ा होने लगा है और उसकी उम्र ढलने लगी है ।

मनुष्य के बुड्ढे होने की 4 निशानियां

1 . बालों का सफेद होना
2 . आंखों से देखने की क्षमता में कमी आना
3 . कानों से कम सुनाई देना
4 . तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित होना

मनुष्य के बूढ़े होने की क्या-क्या निशानियां है ? कौन-कौन से इशारे करते हैं कि अब वह बुड्ढा हो चुका है ?

बालों का सफेद होना

जब इंसान बुढ़ापे की तरफ आकर्षित होता है तब उसकी पहली निशानी होती है उसके बाल । जैसे जैसे इंसान बूढ़ा होने लगता है उनके बालों का रंग काले से सफेद होने लगता है ।

यह किसी भी इंसान की बुढ़ापे की ओर जाने की प्रक्रिया का पहला चरण होता है । यहीं से बुढ़ापे की शुरुआत होती है ।

आंखों से कम दिखाई देना

बुढ़ापे की दूसरी निशानी यह है कि जब भी इंसान बड़ा होने लगता है उनके आंखों की नेत्र ज्योति कमजोर होने लगती है और उन्हें देखने में परेशानी होने लगती है । क्योंकि आंखों की रोशनी कमजोर होने के कारण वह ठीक से देख नहीं पाता है ।

कानों से कम सुनाई देना

बूढ़े होने की तीसरी निशानी यह है की बुढ़ापे में हमें कानों से सुनाई देने की क्षमता में भी कमी आती है । और हमें बहुत ही कम सुनाई देने लगता है । यदि कोई बहुत तेज आवाज में बोलता है तभी हम उसे ठीक से सुन पाते हैं ।

धिमि आवाजों को अक्सर हम सुन नहीं पाते हैं या फिर हमें एक से अधिक बार बोलने पर कोई भी आवाज सुनाई देती है ।

बहुत सारी बीमारियों से ग्रसित होना

बुढ़ापे की चौथी निशानी यह है कि इस उम्र में व्यक्ति के दांत भी गिरने लगते हैं । अब हमारे मुंह में 32 दांतो की जगह कुछ ही दांत शेष रह जाते हैं ।

दातों के कम हो जाने के कारण हम ठीक से खा पी नहीं पाते हैं और हम कठोर चीजों को तो बिल्कुल भी नहीं खा सकते हैं ।

बुढ़ापे की आखिरी निशानी यह होती है कि इस उम्र में व्यक्ति को बहुत सारी बीमारियों घेर लेती है और वह अलग अलग तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है । व्यक्ति का इम्यूनिटी पावर कमजोर हो जाता है । उनके रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है ।

वह नॉर्मल बीमारी से भी जल्दी से ठीक नहीं होता है । और उन्हें काफी दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है । छोटी छोटी चीजों से ही वह बीमार पड़ जाते हैं और उनके काम करने की क्षमता में भी कमी आ जाती है ।